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महाशिवरात्रि पर ढकाइच गांव में स्थापित होगी आदिदेव शिव की 10 फीट ऊंची प्रतिमा

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-300 वर्ष पुराने आदिदेव शिव मंदिर की गौरवशाली रहा है परंपरा,गंगा के प्रकोप से गांव बचाने की प्रचलित मान्यता


न्यूज 11 बिहार | डुमरांव
सिमरी प्रखंड के ढकाइच गांव में आगामी 15 फरवरी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। 15 फरवरी को आदिदेव भगवान भोलेनाथ की 10 फीट ऊंची प्रतिमा को पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर गांव में उत्सव जैसा माहौल है और ग्रामीण जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं।
–300 वर्ष पुराने आदिदेव शिव मंदिर की गौरवशाली रहा है परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार ढकाइच गांव स्थित आदिदेव शिव मंदिर का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है। गांव के 90 वर्षीय बुजुर्ग राजेश्वर गोस्वामी बताते हैं कि जब ढकाइच गांव गंगा की प्रचंड लहरों के कारण अस्तित्व संकट से जूझ रहा था, उस समय इसी गांव के हकार गोस्वामी ने बनारस से भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग लाकर ढकाइच के बधार में स्थापित किया था। मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा और प्रकोप से गंगा की धारा मुड़ी और गांव डूबने से बच गया।
इसके बाद हकार गोस्वामी के नाती किशुन गोस्वामी के प्रयास से यहां विधिवत शिव मंदिर की स्थापना की गई। इस कार्य में पूरे गांव ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया था। मंदिर के लिए भूमि दान श्रीधारी दुबे के पूर्वजों द्वारा किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर स्थापना के बाद गांव में सुख-समृद्धि आई और यह स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
-कोलकाता से आ रहा है भगवान भोले नाथ का 10 फिट ऊंची प्रतिमा
अब वर्तमान समय में इसी ऐतिहासिक आदिदेव शिव मंदिर परिसर में भगवान भोलेनाथ की 10 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह प्रतिमा कोलकाता से मंगाई गई है, जो अपनी कलात्मकता और दिव्यता के लिए विशेष मानी जा रही है। 15 फरवरी को महा शिवरात्रि के दिन विशेष पूजा, हवन और अनुष्ठान के साथ प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया है, जिसमें दूर-दराज से आने वाले भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। आयोजन में कई गणमान्य लोग, संत-महात्मा और आसपास के गांवों के श्रद्धालु शामिल होंगे। पूरे आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीणों का सामूहिक सहयोग देखने को मिल रहा है।
ढकाइच गांव के लिए यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है।

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