Advertisement

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में भ्रष्टाचार का आरोप, नैनिजोर पंचायत का मामला उजागर

Share

-वास्तविक लाभुक को वंचित कर दूसरे को दिया गया आवास का लाभ,बीडीओ,आवास पर्वेक्षक एवं आवास सहायक पर लोक शिकायत निवारण कार्यलय द्वारा शास्ति एवं अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा


न्यूज 11 बिहार | बक्सर

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला डुमरांव अनुमंडल के ब्रह्मपुर प्रखंड अंतर्गत नैनिजोर पंचायत से सामने आया है। आरोप है कि आवास सहायक एवं संबंधित वरीय पदाधिकारियों की मिलीभगत से वास्तविक लाभुक को योजना का लाभ न देकर दूसरे व्यक्ति को लाभ दे दिया गया। यह मामला वार्ड संख्या 9 की रहने वाली कंचन देवी से जुड़ा है, जिनके नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना स्वीकृत थी, लेकिन राशि वार्ड संख्या 2 की रहने वाली समान नाम की महिला कंचन देवी के खाते में भेज दी गई।
पीड़िता के पति जितेंद्र यादव ने बताया कि उनकी पत्नी कंचन देवी के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ था। आवास सहायक द्वारा उनकी झोपड़ी की तस्वीर भी ली गई थी। इसके बावजूद योजना का लाभ उन्हें न देकर उसी पंचायत की वार्ड संख्या 2 की कंचन देवी पति जितेंद्र यादव दे दिया गया, जिनका पूर्व से ही पक्का मकान मौजूद है। इस मामले में बीडीओ ब्रह्मपुर,आवास पर्वेक्षक एवं आवास सहायक के विरुद्ध शास्ति एवं अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा कर डीएम को भेजा गया है। बताते चले की इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित जितेंद्र यादव ने 12 नवंबर 2025 को ब्रह्मपुर के बीडीओ को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि बीडीओ द्वारा न तो कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही किसी प्रकार की जांच टीम का गठन किया गया। निराश होकर पीड़ित ने अनुमंडल लोक शिकायत निवारण कार्यालय, डुमरांव में परिवाद दायर किया। दायर परिवाद के आलोक में एसपीजीआरओ डुमरांव द्वारा लोक प्राधिकार सह बीडीओ ब्रह्मपुर को नोटिस जारी कर प्रतिवेदन की मांग की गई। जांच प्रतिवेदन को लोक प्राधिकार सह बीडीओ ब्रह्मपुर के द्वारा प्रस्तुत करते हुए यह स्वीकार किया गया कि पंचायत की स्थायी प्रतीक्षा सूची में क्रम संख्या 184 पर पीएमएवाईजी आईडी के तहत कंचन देवी पति जितेंद्र यादव का नाम दर्ज है और पंचायत में एक ही नाम के दो व्यक्ति होने के कारण पहचान में भ्रम उत्पन्न हुआ। प्रतिवेदन में इसे मानवीय भूल बताते हुए कहा गया कि जानबूझकर कोई गड़बड़ी नहीं की गई।
हालांकि, जांच के बाद गलत लाभुक को दी गई राशि की वसूली कर सरकारी खाते में जमा करा दी गई है और वास्तविक लाभुक को योजना का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बावजूद इसके, लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने प्रतिवेदन को अंतरिम मानते हुए इसे असंतोषजनक बताया। सुनवाई की कई तिथियां तय होने के बावजूद लोक प्राधिकार द्वारा दोषी कर्मियों को चिन्हित नहीं किया गया।
एसपीजीआरओ ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के मामले बिना प्रखंड कार्यालय के कर्मियों और पदाधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। दोषियों को बचाने का प्रयास प्रथम दृष्टया सही मंशा को नहीं दर्शाता। इसे बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के प्रति उदासीन रवैया बताते हुए बीडीओ ब्रह्मपुर, संबंधित ग्रामीण आवास सहायक एवं आवास पर्यवेक्षक के विरुद्ध शास्ति एवं अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। आदेश की प्रति जिलाधिकारी बक्सर को भी भेजी गई है।

तीन किस्तों मे जाता है राशि
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभुकों का चयन एवं राशि भुगतान की प्रक्रिया केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित स्पष्ट नियमों के अनुसार की जाती है। लाभुकों का चयन सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के आंकड़ों के आधार पर तैयार स्थायी प्रतीक्षा सूची से किया जाता है। पात्र लाभुक वही होते हैं जिनके पास पक्का मकान नहीं है या जो कच्चे/जर्जर आवास में रहते हैं। चयन की अंतिम प्रक्रिया ग्राम सभा में की जाती है, जहां नाम पढ़कर दावा-आपत्ति ली जाती है। ग्राम सभा की स्वीकृति के बाद ही लाभुक को योजना में शामिल किया जाता है। उसके बाद राशि लाभुक के खातो में डीबीटी के माध्यम से तीन किस्तों में जाती है। प्रथम किस्त नींव निर्माण, दूसरी किस्त दीवार/छत स्तर और अंतिम किस्त आवास पूर्ण होने पर। प्रत्येक किस्त से पूर्व भौतिक सत्यापन एवं जियो-टैगिंग अनिवार्य है। किसी भी परिस्थिति में राशि नकद नहीं दी जाती और न ही अपात्र व्यक्ति को भुगतान की अनुमति है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *