मनरेगा योजना के तहत 8.5 से 9.95 लाख रुपये तक खर्च कर बनाए जा रहे बहुप्रतीक्षित खेल मैदान
न्यूज़ 11 बिहार | बक्सर
युवाओं में खेल भावना को प्रोत्साहन एवं ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से नावानगर प्रखंड के सभी 16 पंचायतों में खेल मैदान निर्माण की योजना चलाई जा रही है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2024-25 के तहत मनरेगा योजना के माध्यम से संचालित हो रही है। अब तक 12 पंचायतों में खेल मैदान का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र के युवाओं को एक अच्छा मैदान मिल जाएगा।
-12 पंचायतों में मैदान तैयार, 4 में बाधाएं

प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा अमरेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि अब तक कडसर, अतिमी, भटौली, परमानपुर, मणिया, बाबूगंज इंग्लिश, सिकरौल, बेलहरी और गिरिधरबराव पंचायतों में कुल 12 खेल मैदानों का निर्माण हो चुका है। इनमें बाबूगंज इंग्लिश में 3, सिकरौल में 2 तथा अन्य पंचायतों में एक-एक खेल मैदान बनाए गए हैं।हालांकि, कुछ पंचायतों में मैदान निर्माण की प्रक्रिया बाधित है। आथर एवं सोनवर्षा पंचायतों में भूमि विवाद के कारण कार्य प्रभावित हुआ है, जबकि बेलाव और वैना पंचायतों में अब तक खेल मैदान निर्माण के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान निकाल कर कार्य शुरू किया जाए।
-तीन श्रेणियों में हो रहा मैदान का निर्माण

मनरेगा विभाग के अनुसार खेल मैदानों का निर्माण भूमि की उपलब्धता के आधार पर तीन श्रेणियों में किया जा रहा है। बड़े मैदान (चार एकड़ तक) इन मैदानों में क्रिकेट, फुटबॉल, ऊंची कूद, लंबी कूद, कबड्डी और खो-खो जैसी विविध खेल गतिविधियों की सुविधा विकसित की जा रही है। मध्यम आकार के मैदान (1 से 1.5 एकड़) इन मैदानों में बैडमिंटन, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, रनिंग ट्रैक के साथ फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों की सुविधाएं मिलेंगी। छोटे मैदान (1 एकड़ से कम) इनमें बैडमिंटन, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और रनिंग ट्रैक जैसे खेलों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा बनाया जा रहा है।
खर्च का अनुमान: 8.5 से 9.95 लाख तक
हर खेल मैदान के निर्माण पर अनुमानित रूप से 8.5 लाख से लेकर 9.95 लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं। यह राशि मैदान की श्रेणी और उसमें विकसित की जा रही सुविधाओं के अनुसार निर्धारित की गई है।
-ग्रामीण प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि इन खेल मैदानों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में खेल के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ेगी। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन संभव होगा, बल्कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकेंगे।–अमरेन्द्र कुमार.पीओ नावानगर














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