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डुमरांव विधानसभा: चतुर्थ कोणीय मुकाबले से रोचक हुई चुनावी जंग, विकास बनाम वादों की जंग तेज

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राजनीतिक पृष्ठभूमि: बदलते समीकरण और पुराने दावेदारों की कसौटी

एनडीए प्रत्याशी राहुल सिंह का हमला,कागजों पर हुआ विकास

जन सुराज की नई एंट्री,युवाओं और बदलाव की राजनीति पर फोकस

न्यूज 11 बिहार | बक्सर (डुमरांव)

बक्सर जिले की डुमरांव विधानसभा सीट पर इस बार का चुनावी संग्राम बेहद दिलचस्प मोड़ ले चुका है। 6 नवंबर को होने वाले प्रथम चरण के मतदान से पहले यहां का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग गया है। परंपरागत रूप से राजनीतिक रूप से सक्रिय इस क्षेत्र में इस बार मुकाबला चतुर्थ कोणीय हो गया है। एक ओर एनडीए प्रत्याशी राहुल कुमार सिंह, दूसरी ओर महागठबंधन के वर्तमान विधायक रह चुके अजीत कुमार कुशवाहा, वहीं बहुजन समाज पार्टी से पूर्व मंत्री और दबंग नेता ददन पहलवान यादव, और जन सुराज पार्टी से डुमरांव राज परिवार के युवा चेहरा शिवांग विजय सिंह  ये चारों उम्मीदवार अपने-अपने एजेंडा और जनसंपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं।

डुमरांव की राजनीतिक पृष्ठभूमि

डुमरांव विधानसभा का इतिहास राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कभी जदयू की पकड़ मजबूत रही, तो कभी वाम दलों ने अपनी जड़ें जमाईं। वर्ष 2020 में महागठबंधन से माले (भाकपा-माले) के अजीत कुमार कुशवाहा ने यह सीट जीतकर सत्ता में वापसी की थी। इस बार महागठबंधन ने पुनः उन पर भरोसा जताया है। दूसरी ओर, जदयू ने पिछली बार टिकट काटकर अंजुम आरा को मैदान में उतारा था, पर हार का सामना करना पड़ा था। इस बार एनडीए ने नई ऊर्जा के साथ राहुल कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है।

एनडीए बनाम महागठबंधन: विकास का मुद्दा सबसे आगे

एनडीए प्रत्याशी राहुल सिंह जनता के बीच विकास कहां हुआ?  के सवाल के साथ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने न्यूज़ 11 बिहार से बातचीत में कहा कि डुमरांव की सड़कों की हालत जर्जर है, नालियां बह रही हैं, नगर में जाम की समस्या विकराल रूप ले चुकी है, जबकि फुटपाथी दुकानदारों और बस स्टैंड की व्यवस्था अब तक अधर में है। बाइपास के लिए सब कुछ हो चुका लेकिन भूमि अधिग्रहण तक नहीं हुआ उनका कहना है कि महागठबंधन के शासनकाल में विकास कागज़ों पर हुआ है, जमीनी हकीकत कुछ और है। राहुल ने कहा की एनडीए की सरकार ने डुमरांव को  मेडिकल कॉलेज और नावानगर को इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित किया है जो धरातल पर साफ दिखाई दे रहा है।

महागठबंधन का दावा ; विकास की गंगा बहाई

वर्तमान विधायक अजीत कुशवाहा अपने कार्यकाल को उपलब्धियों से भरा बताते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना में कई योजनाएं शुरू कीं। वे कहते हैं कि विपक्ष केवल आलोचना कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि कई योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचा है। कुशवाहा जातिगत समीकरणों पर भी मजबूत पकड़ रखते हैं, जिससे महागठबंधन को इस क्षेत्र में परंपरागत समर्थन मिलता रहा है।

जन सुराज की एंट्री से समीकरण बिगड़े

इस बार प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज की एंट्री ने चुनावी गणित को और पेचीदा बना दिया है। डुमरांव राज परिवार से आने वाले शिवांग विजय सिंह युवा और शिक्षित चेहरा हैं। वे जातिवाद से ऊपर उठकर सुशासन और पारदर्शी राजनीति  का संदेश दे रहे हैं। शिवांग का कहना है कि डुमरांव में जातीय राजनीति ने विकास को रोक दिया, अब बदलाव की जरूरत है।

ददन पहलवान की वापसी से बढ़ी हलचल

वहीं ददन पहलवान यादव, जो कभी डुमरांव के राजनीतिक अखाड़े के सबसे बड़े खिलाड़ी माने जाते थे, इस बार बहुजन समाज पार्टी के सिंबल पर मैदान में हैं। दो बार विधायक और मंत्री रह चुके ददन पहलवान की राजनीतिक जमीन भले कुछ कमजोर हुई हो, लेकिन उनकी स्थानीय पकड़ और व्यक्तिगत नेटवर्क अभी भी प्रभावशाली है। उनके मैदान में आने से यादव और अति पिछड़ा वर्ग के वोटों का बिखराव तय माना जा रहा है, जिससे मुख्य मुकाबले में किसी भी पक्ष को बढ़त या नुकसान हो सकता है।

समीकरणों का गणित ,किसे होगा फायदा, कौन होगा नुकसान

इस बार डुमरांव का मुकाबला चार कोनों में बंटा हुआ है।

जन सुराज युवा, शहरी और परिवर्तन चाहने वाले मतदाताओं पर नजर बनाए हुए है।

एनडीए को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और विकास एजेंडा उन्हें लाभ देगा।

महागठबंधन जातीय समीकरणों और संगठनात्मक मजबूती पर भरोसा कर रहा है।

BSP ददन पहलवान की छवि पर वोटों के बंटवारे का खेल खेल रही है।

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