महागठबंधन ने फिर जताया भरोसा, माले से डॉ. अजीत कुमार सिंह मैदान में,एनडीए का नया चेहरा, जदयू से अधिवक्ता राहुल कुमार सिंह को टिकट
राजपरिवार की एंट्री, जन सुराज से शिवाग विजय सिंह ने ठोकी दावेदारी,मतदाता खामोश, क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक चर्चाएं
न्यूज 11 बिहार | बक्सर
डुमरांव विधानसभा सीट पर इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक होता जा रहा है। तीनों प्रमुख उम्मीदवार न केवल शिक्षित हैं, बल्कि अपने-अपने राजनीतिक दलों और सामाजिक समर्थन के साथ मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं। इस बार मुकाबला महागठबंधन, एनडीए और जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय होता दिख रहा है। महागठबंधन की ओर से एक बार फिर भाकपा (माले) के डॉ. अजीत कुमार सिंह को टिकट दिया गया है। डॉ. सिंह ने 2020 में इसी सीट से जीत दर्ज की थी और पिछले पांच वर्षों तक डुमरांव के विधायक रहे हैं।
उनके कार्यकाल को लेकर मतदाताओं की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उन्होंने बार-बार विधानसभा में उठाया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर कुछ असंतोष भी दिखाई दे रहा है। वहीं, एनडीए गठबंधन ने इस बार जदयू के टिकट पर अधिवक्ता राहुल कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। एक नए चेहरे के रूप में राहुल सिंह को पेश किया गया है।
2020 में इस सीट से ददन पहलवान का टिकट काटकर अंजुम आरा को उतारा गया था, जिन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी ने नई रणनीति के तहत स्थानीय और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार पर दांव खेला है। राहुल सिंह अपने क्षेत्र में लंबे समय से सामाजिक और विधिक सेवा से जुड़े रहे हैं, जिससे उन्हें युवा और पेशेवर वर्ग का समर्थन मिलने की उम्मीद है।
तीसरे प्रमुख उम्मीदवार के रूप में जन सुराज पार्टी से राजपरिवार के सदस्य शिवांग विजय सिंह ने अपनी दावेदारी ठोंकी है। युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच उनका एक अलग प्रभाव देखा जा रहा है। शिवांग सिंह पारंपरिक राजनीति से अलग जन संवाद और स्वराज की बात करते हैं, जिससे उनके इर्द-गिर्द एक नया राजनीतिक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि इस बार चुनाव में मतदाता बेहद खामोश हैं।
कोई खुलकर अपनी राय नहीं दे रहा, जिससे प्रत्याशियों की चिंता बढ़ी हुई है। गांवों से लेकर कस्बों तक चाय दुकानों और चौपालों में चुनावी चर्चाएं जरूर हो रही हैं, लेकिन स्पष्ट झुकाव का अभाव है। कई पुराने जातीय समीकरण भी इस बार बदलते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार चुनाव में व्यक्तिगत छवि, पिछले कार्यकाल की उपलब्धियां, और स्थानीय मुद्दों पर उम्मीदवारों की पकड़ निर्णायक भूमिका निभाएगी।
डुमरांव का यह मुकाबला सिर्फ दलों का नहीं, बल्कि विचारों और छवियों का भी संघर्ष बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता अंततः किसके पक्ष में अपना जनादेश देती है और कौन बनता है डुमरांव का नया प्रतिनिधि। दो प्रत्याशी डॉ अजित सिंह एवं शिवांग विजय सिंह द्वारा नामांकन दाखिल कर दिया गया है दोनों प्रत्याशी क्षेत्र में अपने अपने वोटर के यहाँ जाना भी शुरू कर दिए है














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