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म्यूटेशन, मनरेगा और स्वास्थ्य योजनाओं पर फोकस, डीएम साहिला ने तय की समयसीमा

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बक्सर। सोमवार को जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा करना तथा आपसी समन्वय को और मजबूत बनाना रहा। बैठक में कृषि विभाग द्वारा संचालित एग्रीस्टैक अभियान के अंतर्गत किसान पंजीकरण कार्य की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने बीडीओ, अंचलाधिकारी, सर्वे अमीन एवं कृषि समन्वयकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि 6 से 11 जनवरी तक विशेष अभियान चलाया गया है। उन्होंने निर्देश दिया कि किसान पंजीकरण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे भी निरंतर जारी रखा जाए।

-75 दिनों से अधिक लंबित दाखिल-खारिज को एक सप्ताह के अंदर करे निष्पादित

राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान डीएम ने सभी अंचलाधिकारियों को म्यूटेशन, भूमि विवाद एवं ई-मैपिंग से संबंधित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 75 दिनों से अधिक लंबित म्यूटेशन मामलों को एक सप्ताह के भीतर निष्पादित करने का स्पष्ट आदेश दिया गया। जन शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत सीएम डैशबोर्ड, सीपीग्राम्स, लोक शिकायत एवं जनता दरबार में प्राप्त आवेदनों के त्वरित निष्पादन पर जोर दिया गया। दोनों अनुमंडल पदाधिकारियों को व्यक्तिगत निगरानी करने तथा प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

-मनरेगा को 30 हजार मानव दिवस का लक्ष्य

भूमि बैंक की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी अंचलाधिकारियों को 15 जनवरी तक रिपोर्ट समर्पित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही लंबित न्यायालयीन मामलों एवं जनता दरबार से संबंधित आवेदनों के निष्पादन के लिए शिकायत निगरानी प्रकोष्ठ को सक्रिय रखने को कहा गया। डीएम ने अधिकारियों को आमजन की समस्याएं संवेदनशीलता एवं सम्मान के साथ सुनने का निर्देश दिया। मनरेगा की समीक्षा में डीपीओ मनरेगा को ई-केवाईसी की प्रगति बढ़ाने, पीआरएस की फील्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा वीडियो कॉल के माध्यम से उपस्थिति सत्यापन के निर्देश दिए गए। मानव दिवस सृजन पर विशेष जोर देते हुए 30 हजार मानव दिवस का लक्ष्य निर्धारित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में संस्थागत प्रसव बढ़ाने, आशा कार्यकर्ताओं की फील्ड गतिविधियां सुदृढ़ करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के निर्देश दिए गए। वहीं उद्योग विभाग की समीक्षा में ईको-सेंसिटिव जोन, ब्लैकबक संरक्षण एवं ड्रेनेज से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

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