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हाईकोर्ट के आदेश से साफ हुई स्थिति, ऋत्विक को छोड़ना पड़ा पद

हाईकोर्ट के आदेश से साफ हुई स्थिति
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-हाईकोर्ट के आदेश से विवाद पर लगी विराम की मुहर
-मनीष कुमार ने संभाला डुमरांव और बक्सर दोनों नगर परिषद का कार्यभार
-जन्माष्टमी की छुट्टी के दिन कार्यालय खुलवाने से शुरू हुआ था विवाद
-कानूनी रूप से कमजोर पड़ने पर कुमार ऋत्विक को छोड़ना पड़ा पद


न्यूज़ 11 बिहार। बक्सर
लंबे समय से नगर परिषद बक्सर और डुमरांव में कार्यपालक पदाधिकारी के पद को लेकर जारी विवाद आखिरकार पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद समाप्त हो गया है। बुधवार को कानूनी रूप से स्थिति साफ होते ही डुमरांव नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार ने पुनः नगर परिषद बक्सर का कार्यभार संभाल लिया। वहीं, दूसरी ओर कार्यपालक पदाधिकारी पद पर बैठे कुमार ऋत्विक को अंततः अपना पद छोड़ना पड़ा।
दरअसल, पूरे विवाद की जड़ कुमार ऋत्विक द्वारा पूर्व के आदेश का हवाला देकर नगर परिषद बक्सर का स्वतः प्रभार लेने से जुड़ी है। जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी की छुट्टी के दिन उन्होंने कार्यालय खुलवाकर नगर परिषद बक्सर का पदभार ग्रहण कर लिया था। उस समय कार्यपालक पदाधिकारी मनीष कुमार अवकाश पर थे। इस कदम ने नगर प्रशासन में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी। इसी बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान सभी तरह के तबादले और पदस्थापन पर रोक भी लगा दी थी, जिससे मामला और जटिल हो गया।
स्थिति को लेकर जब विवाद बढ़ा, तो मनीष कुमार ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट आदेश जारी किया और पूर्व में जारी विभागीय तथा जिला प्रशासनिक आदेशों पर रोक लगा दी। न्यायालय के इस आदेश ने मनीष कुमार के पक्ष को मजबूत कर दिया। नतीजतन, बुधवार को उन्होंने न केवल डुमरांव नगर परिषद का कार्यभार संभाला, बल्कि नगर परिषद बक्सर में भी विधिवत योगदान देकर अपनी जिम्मेदारी ग्रहण कर ली।
हालांकि, इस दौरान कुमार ऋत्विक पद छोड़ने को तैयार नहीं थे। उन्होंने हरसंभव प्रयास किया कि किसी तरह कार्यपालक पदाधिकारी पद पर बने रहें, लेकिन अदालत के आदेश और कानूनी स्थिति कमजोर होने के कारण अंततः उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर परिषद बक्सर और डुमरांव दोनों जगह प्रशासनिक तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है। लंबे समय से चली आ रही खींचतान और भ्रम की स्थिति अब समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी लोग मान रहे हैं कि अब नगर परिषद के नियमित कामकाज और विकास योजनाओं में तेजी आएगी।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। मनीष कुमार के पुनः योगदान से जहां प्रशासनिक स्थिरता लौटने की संभावना बनी है, वहीं नगर परिषद बक्सर और डुमरांव दोनों जगह अब सुचारु रूप से कार्य होने की उम्मीद की जा रही है।

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